संवाददाता-अजय पांडे प्रयागराज*
*प्रयागराज।* क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल *भीटेश्वर धाम दुबहा* में चल रहे *सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ* के चतुर्थ दिवस शनिवार को भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
*कथा व्यास डॉक्टर अरुणाचार्य जी महाराज* ने अपने ओजस्वी और मधुर वाणी से आज के दिन *5 प्रमुख प्रसंगों* का वर्णन कर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
*1. गजेंद्र मोक्ष प्रसंग:* महाराज जी ने कहा – “जब गजेंद्र हाथी ग्राह के जाल में फंस गया और उसके अपने साथियों ने साथ छोड़ दिया, तब उसने सच्चे मन से भगवान श्री हरि को पुकारा। भगवान ने गरुड़ पर सवार होकर तुरंत आकर गज की रक्षा की। सीख यह है कि जब संसार साथ छोड़ दे,तब भी भगवान साथ नहीं छोड़ते, बस पुकार सच्ची होनी चाहिए।”
*2. समुद्र मंथन प्रसंग:* देवताओं और दानवों द्वारा समुद्र मंथन, 14 रत्नों की प्राप्ति,भगवान कूर्म अवतार और मोहिनी अवतार की कथा सुनाकर महाराज जी ने समझाया कि अच्छे कार्य में भी विष (हलाहल) निकलता है, जिसे भगवान शिव जैसे महापुरुष ही पचा सकते हैं।
*3. वामन चरित्र:* अहंकारी राजा बलि के दान की परीक्षा लेने के लिए भगवान वामन अवतार लेकर आए। तीन पग में तीनों लोक नाप लिए। महाराज जी ने कहा – “भगवान दान नहीं, दान का अभिमान देखते हैं।”
*4. श्री राम प्रसंग:* मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के आदर्शों पर प्रकाश डाला गया।
*5. श्री कृष्ण जन्मोत्सव – आज का मुख्य आकर्षण:* जैसे ही कथा व्यास ने *”नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की”* का उद्घोष किया, पूरा पंडाल *”हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की”* के जयकारों से गूंज उठा। भगवान श्री कृष्ण का सुंदर बाल रूप झूले में विराजमान कराया गया। श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा की,महिलाओं ने मंगल गीत गाए और पंजीरी, माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया।इस अवसर पर आयोजक मंडल सहित क्षेत्र के सैकड़ों गणमान्य लोग, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
2026-11-01











