भीटेश्वर धाम दुबहा में बाल कृष्ण की लीलाओं से गूंजा पंडाल मटकी फोड़,गोवर्धन पूजा और 56 भोग ने मोहा मन!

डॉ. अरुणाचार्य जी महाराज की अमृतवाणी पर झूमे श्रद्धालु*

*संवाददाता-अजय पांडे प्रयागराज*

*प्रयागराज।* क्षेत्र के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ *भीटेश्वर धाम दुबहा* में चल रहे *सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ* में शनिवार का दिन *बाल कृष्ण के प्रेम, मस्ती और भक्ति* के नाम रहा।आज के दिन *कथा व्यास डॉक्टर अरुणाचार्य जी महाराज* ने अपने मुखारविंद से भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का इतना सजीव वर्णन किया कि पूरा पंडाल वृंदावन बन गया।
*श्री बाल कृष्ण लीला – माखन चोर की लीला:*
महाराज जी ने बताया – “नंदलाला बचपन में कितने नटखट थे। यशोदा मैया के लाख मना करने पर भी गोपियों के घर जाकर माखन चुराते,मटकी फोड़ते और फिर भोली सूरत बनाकर कहते – मैंने नहीं किया। यह लीला हमें सिखाती है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम के भूखे हैं, उनके माखन के नहीं।” कथा सुनते ही बच्चे और महिलाएं भाव-विभोर हो गईं।
*मटकी फोड़ उत्सव – पंडाल में बरसा दही-माखन:*
बाल लीला के दौरान ही पंडाल में *मटकी फोड़* का सजीव मंचन किया गया। एक ऊंची मटकी में दही-माखन भरकर लटकाया गया, जिसे बाल गोपाल बने बच्चों ने फोड़ा। जैसे ही मटकी फूटी, श्रद्धालुओं पर दही-माखन की बौछार हुई और पूरा पंडाल *”गोविंदा आला रे आला”* और *”माखन मिश्री के भोग”* के जयकारों से गूंज उठा।
*गोवर्धन पूजा – छोटी उंगली पर उठाया गोवर्धन पर्वत:*
सबसे मार्मिक प्रसंग रहा *गोवर्धन लीला।* महाराज जी ने कहा – “जब इंद्रदेव ने अभिमान में आकर ब्रज में 7 दिन तक मूसलाधार बारिश की, तो 7 साल के नन्हे कन्हैया ने अपनी छोटी उंगली पर *गोवर्धन पर्वत को 7 दिन तक उठाकर* पूरे ब्रजवासियों, गौ-धन की रक्षा की। यह बताता है कि भगवान कभी अपने भक्तों को अकेला नहीं छोड़ते।” कथा सुनकर कई बुजुर्गों की आंखें भर आईं। पंडाल में गोवर्धन पर्वत की झांकी भी सजाई गई थी।
*छप्पन भोग- महाप्रसाद का अलौकिक दर्शन:*
गोवर्धन पूजा के उपलक्ष्य में आज भगवान श्री बाल कृष्ण को *56 प्रकार के व्यंजनों का छप्पन भोग* अर्पित किया गया। इसमें माखन-मिश्री,लड्डू,पूड़ी,कचौड़ी, खीर,हलवा,फल,मिष्ठान सहित 56 भोगों की विशाल थाली सजाई गई। श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से दर्शन किए और महाप्रसाद ग्रहण किया। पुजारी ने बताया कि यशोदा मैया दिन में 8 पहर,7 दिन तक 56 भोग लगाती थीं, तभी से यह परंपरा है। *रविवार* होने के कारण पंडाल में भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं कृष्ण भजनों पर नाच उठीं। पूरा दुबहा धाम *”राधे-राधे”* के जयकारों से गूंजता रहा। सोमवार को *रास पंचाध्यायी महाराम और श्री कृष्णा रुक्मणी विवाह* का प्रसंग सुनाया जाएगा। आयोजक समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।

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