भीटेश्वर धाम सरकार दुबहा में 7 दिन तक गूंजी भागवत की अमृत धारा सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भावपूर्ण समापन!

संवाददाता-अजय पांडे प्रयागराज

प्रयागराज)। क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री भीटेश्वर धाम सरकार दुबहा में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मंगलवार को सुदामा चरित्र एवं राजा परीक्षित मोक्ष के मार्मिक प्रसंगों के साथ भावपूर्ण समापन हो गया।सात दिनों तक प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा कथा पंडाल आज अंतिम दिन भी “राधे-राधे” और “जय श्री कृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा।
*सुदामा चरित्र – मित्रता की पराकाष्ठा:*
महाराज जी ने कहा – “सुदामा चरित्र केवल गरीबी की कथा नहीं, बल्कि निस्वार्थ मित्रता और सच्ची भक्ति की कथा है। द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने बचपन के गरीब मित्र सुदामा को सिंहासन पर बैठाया,उसके चरण धोए और उसके लाए हुए मुट्ठी भर चावल को तीनों लोकों से भी अधिक प्रेम से खाया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि भगवान को धन-दौलत नहीं, बल्कि प्रेम भरा तांदुल (चावल) और सच्चा भाव चाहिए। भगवान मित्रता में पद नहीं,प्रेम देखते हैं।”जैसे ही महाराज जी ने “कृष्ण-सुदामा की मित्रता” का प्रसंग सुनाया,पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
*परीक्षित मोक्ष – भागवत का फल:*
सात दिनों तक श्रवण करने के बाद राजा परीक्षित को तक्षक नाग के डसने से मोक्ष और गोलोक की प्राप्ति का प्रसंग सुनाया गया। महाराज ने बताया – “जिसने सच्चे मन से सात दिन तक भागवत कथा सुनी,उसका मोक्ष निश्चित है। भागवत कथा सुनने से व्यक्ति के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।”कथा समापन के बाद हवन-पूजन,आरती और पुष्पवर्षा के साथ कथा को विश्राम दिया गया।
*विशाल भंडारे का आयोजन – बुधवार को*
कथा आयोजक *श्री भीटेश्वर धाम सरकार सेवा समिति,दुबहा* ने जानकारी दी कि कथा की पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में 04 नवंबर 2026,दिन बुधवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है।समय दोपहर 2 बजे से प्रभु इच्छा तक,स्थान-भीटेश्वर धाम सरकार दुबहा मंदिर परिसर।आयोजकों ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं,ग्रामवासियों और भक्तजनों से महाप्रसाद ग्रहण करने की सादर अपील की है। उन्होंने कहा कि आप सभी पधार कर भंडारे को सफल बनाएं और महादेव एवं श्री राधाकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करें।इस सात दिवसीय आयोजन में दुबहा, बिनोरी धरा शंकरगढ़,जसरा,बारा सहित आसपास के सैकड़ों गांवों से श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण करने पहुंचे।

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