एतिकाफ की रूहानी फिज़ा में इबादतगुज़ारों का इस्तक़बाल, फूल-मालाओं से हुई हौसला अफ़ज़ाई

(दानिश खान)
कानपुर के घंटाघर स्थित बड़ी मस्जिद में रमज़ान के मुकद्दस अशरे में बैठा एतिकाफ आज रूहानियत और अकीदत के साथ मुकम्मल हो गया। बीसवें रोज़े की इक्कीसवीं शब को मस्जिद में चार बच्चे एतिकाफ में बैठे थे, जिन्होंने दस दिनों तक इबादत में खुद को मशगूल रखा और चाँद नज़र आते ही अपना एतिकाफ मुकम्मल किया।इसी तरह पुराना हैदरगंज निवासी मासूम हमज़ा शहीद ने भी अपने इलाके की मस्जिद में एतिकाफ में बैठकर इबादत का खूबसूरत नमूना पेश किया। कम उम्र में उसका यह जज़्बा लोगों के लिए काबिल-ए-तारीफ बन गया एतिकाफ के दौरान इबादतगुज़ारों ने दुनिया से किनारा कर तिलावत-ए-क़ुरआन, नफ़्ल नमाज़ और दुआओं में अपना वक़्त गुज़ारा। एतिकाफ इस्लाम की एक अहम सुन्नत है, जो बंदे को अपने रब के करीब करने का जरिया बनती है।चाँद दिखाई देते ही मस्जिदों में खुशी और रौनक का माहौल बन गया। एतिकाफ मुकम्मल कर बाहर आए बच्चों का मस्जिद कमेटी और इलाके के लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर गर्मजोशी से इस्तक़बाल किया और उनकी हौसला अफ़ज़ाई की।मस्जिद कमेटी के जिम्मेदारान ने कहा कि बच्चों का इस तरह इबादत में दिलचस्पी लेना समाज के लिए एक बेहतरीन पैग़ाम है। उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला तमाम इबादतों को कबूल फरमाए और सबको दीन पर क़ायम रखे।
यह मंज़र एक बार फिर याद दिलाता है कि रमज़ान इबादत, सब्र और तक़वा हासिल करने का महीना है, जिसमें एतिकाफ जैसी सुन्नतों की खास अहमियत है।

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