भगवान श्री विष्णु की अतिप्रिय माघी पूर्णिमा

कानपुर नगर

आज 24 फरवरी को भगवान श्री विष्णु के अतिप्रिय माघ मास की पूर्णिमा है,,,इसे माघी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

यह पूरे माघ महीने के स्नान, दान, पुण्य, जप एवं तप का अंतिम दिन है। वे हज़ारों-लाखों लोग जो प्रयागराज में गंगा के तट पर कल्पवासी होते हैं। यह उनके कल्पवास की पूर्णता का दिन है।

शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन देवतागण पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आते हैं इस दिन चन्द्रदेव भी अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करते हैं। इस दिन वाग्देवी यानि सरस्वती के स्वरुप ललिता महाविद्या की जयंती भी है। इसी दिन महान संत गुरु रविदास का जन्म हुआ था। उन्होंने मन चंगा तो कठौती में गंगा कहते हुए मन की शुद्धता पर जोर दिया है। होली से एक महीने पूर्व इस पूर्णिमा पर ही होली का डांडा लगाया जाता है इसलिए इसे होलिका डांडा रोपणी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

माघी पूर्णिमा पर स्नान का महत्व..
माघ मास भगवान विष्णु को अतिप्रिय है। शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन श्री हरि गंगाजल में वास करते हैं इसलिए इस दिन गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगाजल का स्पर्श करने मात्र से भी मनुष्य को वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है। माघ पूर्णिमा के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही मन में गंगा मैया का ध्यान कर स्नान करके के बाद भगवान श्री विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा पर ही गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष की साधना का फल मिल जाता है। इस दिन गंगा आदि सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप एवं संताप का नाश होता है, मन एवं आत्मा शुद्ध होती है। इस दिन किया गया महास्नान समस्त रोगों का नाश करके दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

स्नान और दान के वक्त ‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ का मानसिक जप करते रहना चाहिए। यदि आप गंगा स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो गंगाजल के छींटे मारकर पुण्य लाभ ले सकते हैं।

दान और पूजा का महत्व
स्नान के बाद गौदान करने से श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है। जिससे के फलस्वरूप आपके धन और वंश में वृद्धि होती है और आपके सभी कार्य आसानी से पूर्ण हो जाते हैं, सुख-सौभाग्य, धन-संतान की प्राप्ति होती है।

इस दिन पितरों को तर्पण उनके नाम से गौ दान करना भी बहुत ही फलदायी माना गया है। ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उनके आशीर्वाद से आयु एवं आरोग्य में वृद्धि होती है। माघ पूर्णिमा पर स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा जनित दोषों से मुक्ति मिलती है।

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