कानपुर। दानिश खान
रमज़ानुल मुबारक के 14वें रोज़े पर फ़ेथफुल गंज इलाक़ा उस वक़्त रौशन हो उठा, जब 8 बरस के मासूम ने अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा रखकर घर-परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले का सर फ़ख़्र से बुलंद कर दिया।जसीम अहमद के बड़े साहबज़ादे, उनैश अहमद अब्बासी ने कमसिन उम्र में जिस शौक़, लगन और इस्तिक़ामत के साथ अपना पहला रोज़ा मुकम्मल किया, उसने हर देखने वाले का दिल जीत लिया। सुबह सहरी से लेकर शाम इफ़्तार तक मासूम के चेहरे पर अजीब सी रूहानी चमक दिखाई दी।इफ़्तार के वक़्त घर का माहौल ईमानी जज़्बात से सराबोर था। अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्तों और मोहल्ले के लोगों का तांता लगा रहा। हर कोई मासूम को मुबारकबाद देने और उसके लिए दुआ करने पहुंचा। बुज़ुर्गों ने दुआओं से नवाज़ा तो हमउम्र बच्चों ने भी उसे गले लगाकर हौसला अफ़ज़ाई की।वालिदैन की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने बताया कि बच्चे ने खुद रोज़ा रखने की ज़िद की थी और अल्लाह के करम से पूरे सब्र और हिम्मत के साथ अपना पहला रोज़ा पूरा किया।रमज़ान की रहमतों और बरकतों के साए में यह पहला रोज़ा ना सिर्फ़ एक इबादत रहा, बल्कि पूरे ख़ानदान और मोहल्ले के लिए यादगार लम्हा बन गया। मासूम के इस क़दम को लोगों ने उसके मुस्तक़बिल की नेकी और कामयाबी की निशानी क़रार दिया।











