एंटी करप्शन टीम का थाने के भीतर ऑपरेशन,फाइनल रिपोर्ट के नाम पर हो रही थी सौदेबाजी
संवाददाता: अजय पांडे प्रयागराज
बारा,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा थाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी और निर्णायक कार्रवाई ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। बारा थाने के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार सोनकर को एंटी करप्शन टीम ने पचहत्तर हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि एक आपराधिक मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने और नाम हटाने के नाम पर यह रकम मांगी गई थी। शिकायत की परतें खुलीं तो पूरे घटनाक्रम ने एक संगठित सौदेबाजी की तस्वीर सामने ला दी। सूत्रों के अनुसार,भदोही जनपद के सुरियावां थाना क्षेत्र के लुकमानपुर निवासी संतोष कुमार दुबे के खिलाफ बारा थाने में एक मुकदमा दर्ज था। संतोष का कहना है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में उनका नाम नहीं था,लेकिन विवेचना के दौरान उन्हें जबरन नामजद कर दिया गया। इसके बाद कथित रूप से नाम हटाने और फाइनल रिपोर्ट लगाने के एवज में पहले भी धनराशि ली गई। जब दोबारा पचहत्तर हजार रुपये की मांग की गई तो उन्होंने हिम्मत जुटाकर एंटी करप्शन विभाग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत मिलते ही एंटी करप्शन की टीम ने मामले को गोपनीय ढंग से परखा। शुरुआती सत्यापन में रिश्वत मांगने के संकेत मिले। इसके बाद पूरी रणनीति तैयार की गई। योजना के तहत बुधवार को दोपहर लगभग दो बजकर चालीस मिनट पर शिकायतकर्ता तय रकम लेकर बारा थाने पहुंचा। फोन पर हुई बातचीत के बाद प्रभारी निरीक्षक ने उसे सीधे अपने कार्यालय में बुलाया।थाने के भीतर का माहौल सामान्य दिख रहा था, लेकिन टीम पहले से सतर्क थी। जैसे ही इंस्पेक्टर ने पचहत्तर हजार रुपये हाथ में लिए, एंटी करप्शन की टीम ने तत्काल घेराबंदी कर उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया। कार्रवाई इतनी सटीक थी कि आरोपी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मौके पर आवश्यक लिखापढ़ी की गई, साक्ष्य सुरक्षित किए गए और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व एंटी करप्शन के इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार मिश्रा ने किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी निरीक्षक को घूरपुर थाने ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। विभागीय स्तर पर भी जांच की प्रक्रिया शुरू होने की चर्चा है। विनोद कुमार सोनकर मूल रूप से वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र के निवासी बताए जाते हैं। वर्ष दो हजार बारह में दरोगा से पदोन्नत होकर निरीक्षक बने थे। इससे पहले वह खुल्दाबाद थाने में प्रभारी निरीक्षक रह चुके हैं। बाद में शाहगंज थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी,जहां शिकायतों के चलते उन्हें हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया। लगभग छह माह पूर्व उन्हें बारा थाने का प्रभारी बनाया गया था। इस गिरफ्तारी ने न सिर्फ एक थाने की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विवेचना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। फाइनल रिपोर्ट जैसे संवेदनशील कानूनी कदम को लेकर कथित सौदेबाजी की बात सामने आना विभाग के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। जिले में इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आगे की जांच में और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं तथा विभागीय स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं। खबर अपडेट की जा रही है।
2026-02-19











