Kanpur : Danish khan
रमज़ान के मुबारक महीने के आख़िरी अशरे में एतिकाफ की इबादत करने वाले रोज़ेदारों का चांद नज़र आते ही फूल मालाओं से पुरजोश इस्तकबाल किया गया। घंटाघर बड़ी मस्जिद में इस बार खास बात यह रही कि कई कम उम्र के बच्चों ने भी एतिकाफ में बैठकर अल्लाह की बंदगी और तिलावत में वक्त गुज़ारा। उनकी मासूमियत और इबादत के प्रति समर्पण ने पूरे माहौल को और ज़्यादा रुहानी बना दिया।
मस्जिद में जमा लोगों ने एतिकाफ में बैठे इन इबादतगुज़ारों को मुबारकबाद पेश की और उनके लिए दिल से दुआएं मांगी। माहौल में एक अलग ही सुकून और इबादत की रूहानियत महसूस की गई। रमज़ान की इस खास इबादत के जरिए, इन रोज़ेदारों ने खुद को अल्लाह की रहमत और मग़फिरत की उम्मीद से सराबोर कर लिया।
इस मौके मस्जिद कमेटी के मेंबर शमशाद खां, मोहम्मद ऱफ़ीक, असलम खां, यूनुस, मोहम्मद इरफ़ान (बाबू) आदि ने एतिकाफ में बैठे मासूम बच्चों को टोपी और साफ़ा पहनाकर उनका हौसला अफ़ज़ाई की, जिससे पूरे समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। उनकी हिम्मत और जज़्बे को सराहते हुए बुज़ुर्गों ने उन्हें दुआओं से नवाज़ा।
एतिकाफ के दौरान यह इबादतगार पूरी तरह से दुनिया से अलग होकर सिर्फ अल्लाह की याद में मशगूल रहे। उनके इस समर्पण को देखकर पूरे समुदाय में खुशी और इखलास का माहौल बन गया। रमज़ान का यह मुबारक सफर अब ईद की खुशियों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इन इबादतों की बरकतें हमेशा बरकरार रहेंगी।
