नौढिया गाँव में सफाई व्यवस्था ठप गंदगी के साथ प्रधान की लापरवाही उजागर नौढिया गाँव बना कूड़ाघर प्रधान मौन? – जनता त्रस्त

नौढिया गाँव में सफाई व्यवस्था ठप गंदगी के साथ प्रधान की लापरवाही उजागर नौढिया गाँव बना कूड़ाघर प्रधान मौन? – जनता त्रस्त

संवाददाता :- अजय पांडे प्रयागराज

प्रयागराज जनपद के शंकरगढ़ ब्लाक क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सभा नौढिया तरहार आज गंदगी और कूड़े का पर्याय बन चुका है। गाँव के कोने-कोने में फैले कूड़े के ढेर,सड़ांध और जाम पड़ी नालियां साफ बता रही हैं कि यहाँ सफाई व्यवस्था नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं है। गाँव के मुख्य रास्तों से लेकर गलियों तक गंदगी का अंबार है। जगह- जगह प्लास्टिक, गंदा पानी और सड़ांध फैलाने वाला कचरा पड़ा हुआ है। हालात इतने बदतर हैं कि लोगों का गुजरना तक मुश्किल हो गया है। बदबू और मच्छरों के कारण गाँव का माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है। जिम्मेदारों की चुप्पी – गाँव डूबा गंदगी में सवाल यह उठता है कि जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्वच्छता पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं, गाँव-गाँव स्वच्छ भारत अभियान के बोर्ड लगाए जा रहे हैं, तो आखिर नौढिया तरहार क्यों कूड़े में डूबा हुआ है? जवाब है – ग्राम प्रधान और स्थानीय जिम्मेदारों की लापरवाही। और सफाईकर्मी गायब हैं। न तो नालियों की सफाई होती है और न ही कूड़ा उठाया जाता है। हद तो यह है कि सफाई व्यवस्था केवल कागज़ों और फाइलों तक ही सीमित होकर रह गई है। गाँव में जमा कचरा और गंदा पानी मच्छरों व कीटाणुओं की पैदावार का अड्डा बन चुका है। डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा गाँववासियों के सिर पर मंडरा रहा है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन अफसरशाही और प्रधान की कुर्सी पर बैठे जिम्मेदारों को इसकी कोई परवाह नहीं है। ग्राम प्रधान के पास सफाई के नाम पर बजट और संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन गाँव की तस्वीर साफ बताती है कि सब कुछ केवल कागजों में ही खर्च हो रहा है। गली-गली फैली गंदगी प्रधान की कार्यशैली और जिम्मेदारों की लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छ भारत मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। पोस्टर-बैनर और होर्डिंग्स में स्वच्छता की तस्वीर चमकाई जाती है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि नौढिया गाँव जैसे सैकड़ों गाँवों में हालात बद से बदतर हैं। गंदगी और सड़ांध के बीच जी रहे लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।नौढिया तरहार गाँव की ये तस्वीर साफ बताती है कि प्रधान और सफाई व्यवस्था दोनों ने दम तोड़ दिया है। जिम्मेदार सोए हुए हैं और गाँव गंदगी की गिरफ्त में सड़ रहा है।

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