प्रेस वार्ता कर जमीयत उलमा ने जुलूस ए मोहम्मदी को लेकर दी जानकारी

(दानिश खान)

कानपुर आज आगामी जुलूस ए मोहम्मदी को लेकर सिटी जमीयत उलेमा ने एक प्रेस वार्ता जमीयत कार्यालय रजबी रोड पर की पिछले 113 सालों से लगातार 1913 से पैगम्बर हजरत मोहम्मद स०आ०वा० 12 रबीउल अव्वल जन्मदिन यौमे विलादत पर एशिया का सबसे बड़ा जुलूस जुलूस ए मोहम्मदी निकलता आ रहा है जो कि इस वर्ष भी 5 सितंबर शुक्रवार को 2 बजे अपनी पूरी शानो शौकत के साथ रिजवी ग्राउंड परेड से उठाया जाएगा जो अपने तय रास्तों से होता फूलबाग में समाप्त होगा जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी ने बताया जुलूस ए मोहम्मदी की अपनी एक सुनहरी तारीख है जब 1913 में भारत की आजादी की जंग जोर शोर से चल रही थी तब यह जुलूस निकाला जाना शुरू हुआ था इस जुलूस में सभी धर्म के लोग शरीक होते हैं जिससे आपसी भाईचारा और एकता का   एक अच्छा माहौल दिखता है यह जुलूस इंसानियत मोहब्बत एकता भाईचारे का एक पैगाम देता है जो हजरत मुहम्मद स०आ०व० की शिक्षाओं का नतीजा है, मौलाना अब्दुल्लाह कासमी ने जुलूस में शरीक होने वाले सभी अंजुमनों से गुजारिश की है सभी लोग जुलूस में अनुशासित होकर चले पहले से अपनी टोकन प्राप्त कर ले जिससे जुलूस में टोकन के हिसाब से ही चले इसके अलावा जुलूस में साफ कपड़े टोपी या इमामा पहनकर व इत्र लगाकर दुरूद शरीफ नात पढ़ते हुए चले झंडो में लोहे के रॉड से बचे झंडो की लंबाई 8 फीट से ऊंची न हो जुलूस में सियासी नारे न लगाए जाए लाउडस्पीकर साउंड 2 से अधिक न लगाए जाए तबर्रुक फेक कर न दे बल्कि लोगों के हाथ में तकसीम करे ताकि खाने की बर्बादी न हो, मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी व डॉ अमीनुल खान ने अपनी इस अपील में मुस्लिम भाइयों से अनुरोध किया है जुलूस ए मोहम्मदी का सम्मान और गरिमा का खास ध्यान रखते हुए जुलूस को शांति इंसानियत और तहज़ीब का प्रतीक बनाए, ज़ुबैर अहमद फारूकी ने कहा कोई भी  संगठन अपने झंडे के साथ जुलूस के बीच में प्रवेश न करें जिससे जुलूस में अव्यवस्था उत्पन हो, प्रेस वार्ता मे मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी, डॉ अमीनुल खान, अब्दुल मुईद चौधरी, मौलाना नूरुद्दीन कासमी, मौलाना अकरम जामई, मौलाना अनीस अहमद कासमी, मौलाना अंसार अहमद जामई, मुफ्ती इजहार मुकर्रम कासमी आदि लोग उपस्थित रहे।

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