कन्वीनर मोहम्मद अनीस के मकान मोहल्ला अब्बासी में एक नातिया मुशायरे का एनिकाद किया गया

रूदौली अयोध्या।अहमद जीलानी खान
करवान ए इंसानियत के ज़ेर ए एहतमाम अजीमुश्शान नातिया मुशायरा

कन्वीनर मोहम्मद अनीस के मकान मोहल्ला अब्बासी में एक नातिया मुशायरे का एनिकाद किया गया
जिस की सदारत तनक़ीद निगार शमीम हैदर रुदौलवी ने की
और निज़ामत मशहूर शायर काविश रुदौलवी ने की
मेहमान ए खुसूसी के तौर पर तारिक़ जीलानी और मेहमान ए ज़ि वक़ार के तौर पर फैज़ खुमार ने शिरकत की
इस मौक़े पर हमदम रुदौलवी को करवान ए इंसानियत की जानिब से खुमार बाराबंकवी अवार्ड से नवाज़ा गया जिस की ख़ासो आम ने मुबारकबाद पेश की
मुशायरे का आगाज़ तिलावत ए कलाम पाक से सादर शमीम हैदर ने किया
मुशायरा पूरी कामयाबी के साथ देर रात तक चलता रहा
पसंदीदा शेर पेश हैं

कांकरियों ने तो मुट्ठी में क़िस्मत संवार ली
बु जहल के नसीब पे मिट्टी पड़ी रही
(काविश रुदौलवी)

साहिब इस्म ए मोहम्मद को अगर लिखना पड़े तुम को
मोहम्मद मुस्तफा लिख कर इमाम उल अंबिया लिखना
(शहीब कौसर)

छू कर नबी के जिस्म ए मुबारक को बार बार
ताइफ के पत्थरों को अदा प्यार की मिली
(असलम सैदनपुरी)

नुज़ूल ए रहमत ए परवरदिगार होते ही
चली है झूम के बाद ए सबा मदीने से
(नफीस बाराबंकवी)

खुदा से मांगो तो अहमद का वास्ता दे कर
ज़बान भी न खुले और काम हो जाए
(मुजीब रुदौलवी)

तारीफ उन की मैं करूं मेरी बिसात क्या
करता है खुद खुदा भी बड़ाई हुज़ूर की
(नुरैन चमन वली)

संग  वाले  न  आईना वाले
खुलद जाएंगे मुस्तफा वाले
(फैज़ खुमार)

जिस राह से गुज़र गए सरकार ए दो जहां
सहरा तलक तो देखिये गुलज़ार हो गया
(हमदम रुदौलवी)

मदह ए सरकार ए दो आलम हैं हमारा मशग़ला
चैन मिलता है हमें ज़िक्र ए शहे अबरार से
(निसार रुदौलवी)

कल भी हम ये कहते थे आज भी ये नारा है
नाम ए मुस्तफा हम को जान से भी प्यारा है
(अज़ीम अलीआबादी)

नबी के चाहने वालों के लब पर
मुसलसल मुस्तफा या मुस्तफा है
(वफ़ा अलीआबादी)

यूं ही खिलौना बने रहें हम क़मर ने रब से कहा ये होगा
जब उंगलियों से वो पारः कर के घुमा रहे थे हिलाल आक़ा
(महताब रुदौलवी)

असरा की रात हज़रत ए रूहुल आमीन ने
पलकों से अपनी चूमा है तलवा रसूल का
(शमीम असलम)
इन के अलावा अज़ीम रुदौलवी अक़ील नक़वी और अलीम मास्टर ने भी अपना कलाम पेश किया
समाईन की हैसियत से नसीम प्रिंस हनीफ अंसारी मोहम्मद इस्माइल सुल्तान खान तफ़हिम मियां ज़रगम हैदर खान मोहम्मद तौसीफ अंसारी शारिक़ बाबा कलीम उस्मानी साक़िब उस्मानी चांद मियां के नाम काबिल ए जिक्र हैं मुशायरा खत्म होने पर सलीम हमदम ने सब का शुक्रिया अदा किया

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