सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहा गांव का विकास विकास की पोल खोलती जमीनी हकीकत ग्रामीणों का आरोप ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार और लापरवाही विकास की राह में रोड़े

संवाददाता :-अजय पांडे प्रयागराज

प्रयागराज। भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह फैल रहा है, भ्रष्टाचार एक ऐसा संक्रामक रोग है जिसकी चपेट में छोटे कर्मचारियों से लेकर जिले के जिम्मेदारी अधिकारी आ चुके हैं।
जिससे भ्रष्टाचार जैसे संक्रामक रोग पर रोकथाम कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा हो गया है। जिसका जीता जागता उदाहरण विकासखंड शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत डेरावारी का मजरा भैंसहाई गांव है। जहां ग्राम पंचायत में विकास केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। जमीनी हकीकत बेहद चिंता जनक है। हर तरफ कीचड़ से सनी सड़कें, जर्जर और टूटी नालियां, गंदे पानी से पटीं नालियां व बदहाल सार्वजनिक सुविधाएं गांव की तस्वीर को बयां कर रही है। बड़ी आबादी वाले इस गांव में जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। जो नालियां बनी थी वे भी अब जर्जर अवस्था में हैं। दिलेश्वर सिंह,मुकेश भारतीय,इंद्रेश भारतीय, शकुंतला, फूल कली आदि ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि मरम्मत के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन गांव में एक ईंट तक नहीं लगाई जाती। टूटी नालियों की वजह से सड़कों पर गंदा पानी बहता रहता है और संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा और अन्य विकास योजनाओं के अंतर्गत लाखों रुपए का बजट ग्राम पंचायत को मिल रहा है लेकिन इसका उपयोग सार्वजनिक न होकर व्यक्तिगत लाभ में किया जा रहा है। शिकायत करने पर जिम्मेदार नाराज हो जाते हैं। गांव में शुद्ध पेयजल का संकट बना हुआ है। गांव में लगे इंडिया मार्का हैंड पंप अपनी जिंदगी से हार मान बैठे हैं और लोहे की जंक उगल रहे हैं। आगे ग्रामीणों ने कहा कि विकास कार्यों को कई बार कागजों पर दिखाने के लिए जोर दिया जाता है जिससे जमीनी हकीकत में स्थिति दयनीय है। विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार एक बड़ा कारण विभागीय अधिकारियों की मिली भगत है। क्योंकि अधिकारी ग्राम पंचायत के विकास कार्यों की निगरानी नहीं कर रहे हैं जिससे भ्रष्टाचार और लापरवाही का बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीणों ने जांच कर कार्यवाही की मांग की है। इस बाबत जब खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़ मनोज कुमार सिंह पटेल से जानकारी ली गई तो कहा गया कि जांच कर संबंधित के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी। बहरहाल अब आने वाला वक्त बताएगा कि जांच कर विधिक कार्यवाही होगी अथवा मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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