संवाददाता सरवर आलम
वेब पोर्टल द्वारा ऑनलाइन दवा की बिक्री (ई-फार्मेसी) के कारण समाप्त होते व्यापार के विरोध में दवा व्यापारियों द्वारा अपने व्यापार के पुराने स्वरूप को पुनः खोजने के लिये “व्यापार की खोज- एक चिंतन के शाला ” का आयोजन किया गया।
दवाएं आवश्यक वस्तु होने के साथ-साथ आम जनमानस के जीवन की रक्षा करते हुए पूरे समाज को स्वस्थ बना कर रखती हैं। भारतवर्ष में दवाओं का निर्माण, वितरण व बिक्री ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 (नियम 1945) के नियम का पालन करते हुए किया जाता है। खेद का विषय है कि वर्तमान में अनेक ऐसी कम्पनियाँ बाज़ार में आ गई हैं जो इंटरनेट तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दवाओं को उपभोक्ताओं तक पहुंचा रही हैं। इन ई-फार्मेसियों द्वारा अपनाये जा रहे मनमाने रवैये के कारण परम्परागत दवा व्यापार निरंतर कम होता जा रहा है। अपने व्यापार के पुराने स्वरूप को पुनः स्थापित करने के लिये कानपुर के दवा व्यापारियों द्वारा “ व्यापार की खोज एक चिंतन शाला ” का आयोजन किया गया।
संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र सैनी ने कहा कि एक ही कम्पनी के एक ही उत्पाद के दाम देश में अलग अलग हैं।
जिस मूल्य पर एक थोक दवा व्यापारी को (केस/गत्ते की थोक मात्रा में) दवा कम्पनी द्वारा बिल की जा रही है। लगभग उसी मूल्य पर एक स्ट्रिप ग्राहक / मरीज़ को उसके घर तक पहुंचाई जा रही है। ऐसे में थोक दवा व्यापारी GST, अपना मुनाफा, खर्चे आदि जोड़कर जब यह दवा किसी फुटकर दवा व्यापारी को देता है तो इसका मूल्य ई फार्मेसी के मूल्य से अधिक हो जाता है। श्री सैनी ने बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार देश में दवा का परम्परागत व्यापार 40% तक कम हो चुका है जिसका कारण दवाओं का अलग अलग मूल्य होना है। देश में GST लागू करने का एक आधार यह भी था कि पूरे देश में वस्तुओं के दाम में एक रूपता आयेगी परन्तु ई-फार्मेसियों द्वारा अपनाये जा रहे मनमाने रवैये के कारण यह भी सम्भव नहीं हो पा रहा है। श्री राजेंद्र सैनी पूछते हैं कि देश में कार्यरत ये ई-फार्मेसी कम्पनियां आखिर कहाँ से दवा ला रही हैं जो इन्हें इतने कम दामों में बेचा रहा है ?
संस्था के संरक्षक सरदार हरविंदर सिंह भल्ला ने कहा कि दवा का व्यापार अत्यधिक लागत वाला व्यापार है। अधिकांश दवा व्यापारी बैंक से ऋण अथवा लिमिट लेकर अपना व्यापार करते हैं। निरंतर घटते व्यापार से अधिकांश दवा व्यापारियों को अपने बैंक खातों में व्याज, किश्त आदि देने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। अगर इन ई फार्मेसियों को अविलंब रोका न गया तो बड़ी संख्या में दवा व्यापारियों के खाते NPA होंगे तथा दवा व्यापारी अपने व्यापार से पलायन करने को बाधित होंगे।
संस्था के महामन्त्री श्री नंद किशोर ओझा ने कहा कि संस्था इन ई-फार्मेसियों के खिलाफ चरण बद्ध तरीके से लड़ाई लड़ेगी। प्रथम चरण 90 दिनों का होगा जिसमें संस्था द्वारा माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम ज्ञापन उत्तर प्रदेश के समस्त 78 सांसदों को देकर, देश में चल रहे इस गैरकानूनी व्यापार पर अविलम्ब रोक लगवाने का आग्रह करेंगे। द्वितीय चरण में इस विषय पर स्वास्थ्यं एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उर्वरक और रसायान मंत्रालय को ज्ञापन दिये जायेंगे उसके 2022706/10 1772350पने अगले चरणों की ओर अग्रसर हो जायेगी।
संस्था के कोषाध्यक्ष श्री अशोक अग्रवाल ने ज़ोर देकर कहा कि देश में सभी दवा व्यापारी अपना व्यापार समस्त नियमों का अनुपालन करते हुये करते हैं जबकि ई- फार्मेसियों द्वारा ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 (नियम 1945), GST नियम, कम्पटीशन एक्ट 2002 सहित अनेक नियमों/ अधिनियमों की धज्जियाँ उड़ा कर व्यापार किया जा रहा है। श्री अग्रवाल ने बताया कि अभी हाल मे फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के रजिस्ट्रार डॉ मोंटू पटेल ने देश में चल रही ई-फार्मेसियों को नियमों का अनुपालन न करने के कारण गैरकानूनी बताया था।
संस्था के कम्पनी अफेयर्स प्रभारी श्री निकेश तलाटी ने बताया कि वर्तमान में देश में ड्रग लाईसेंस को जारी करने तथा उनके रिटेंशन का कार्य ऑन-लाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। इस पोर्टल में अनेक तकनीकी कमियां है जिसके कारण दवा व्यापारियों को खासी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। श्री तलाटी ने मांग की कि सरकार द्वारा पोर्टल में जो कमियां आ रही हैं उन्हें जल्द से जल्द ठीक कराया जाये।
कार्यक्रम में संस्था के चेयामैन संजय मेहरोत्रा, रोहित टंडन, प्रवीन बाजपेई, सुमित पावा, योगेश अग्रवाल, निकेश तलाटी, संजय अग्रवाल, हरि किशन गुप्ता, उदय गुप्ता, अतुल गुप्ता, राजेश गुप्ता, पंकज कपूर, दीपक निगम, संचित गुप्ता, आर. पी. सचान, गुरजीत भाटिया, दीपांकर बाजपेई, कंवल नैन आहूजा, शेष नारायण तिवारी, संजय अवस्थी, अरविंद नागपाल, नीरज शुक्ला सहित बड़ी संख्या में दवा व्यापारी उपस्थित रहे











